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Monday, September 14, 2020

9 पूर्व IPS ऑफिसर्स ने दिल्ली हिंसा की जाँच पर उठाया सवाल, दिल्ली पुलिस कमिश़्नर को लिखा ओपेन लेटर।

दिल्ली हिंसा में दिल्ली पुलिस के रवैये और जाँच पर सवाल उठाते हुए 9 पुर्व IPS ऑफिसर्स ने दिल्ली पुलिस कमिश़्नर को लिखा ओपेन लेटर।

IPS Cap


दिल्ली पुलिस कमिश़्नर को ओपेन लेटर लिखने वालों में (1)रिटायर्ड IPS शफी आलम ( Shafi Alam ), पुर्व डायरेक्टर जनरल नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्युरो, भारत सरकार,(2)रिटायर्ड IPS अमिताभ माथुर, पुर्व डायरेक्टर एविएशन रिसर्च सेन्टर एवं पुर्व स्पेशल सेक्रेट्री, कैबिनेट सेक्रेट्रीयेट, भारत सरकार, (3)रिटायर्ड IPS के० सलीम अली ( K. Saleem Ali ), पूर्व स्पेशल डायरेक्टर CBI (4) मोहिन्दरपाल औलाख ( Mohinderpal Aulakh ), पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस 'जेल', पंजाब सरकार (5) ए० एस० दौलत ( A. S. Daulat ), पूर्व OSD ऑन काश्मीर, प्रधानमंत्री कार्यालय (6) आलोक बी० लाल ( Aloke B. Lal ), पुर्व डायरेक्टर जनरल 'प्रौसिक्युशन' उतराखण्ड, (7) रिटायर्ड IPS अविनाश ने बनाने ( Avinash Mohananey ), पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सिक्कीम (8) रिटायर्ड IPS पी० जी० जे० नामपुथिरी ( P. G. J. Nampoothiri ), पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, गुजरात और (9) पूर्व IPS  ए० के० समांता ( A. K. Samanta ), पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस 'इंटेलिजेंस' पश़्चिम बंगाल  शामिल हैं।

पुर्व IPS ऑफिसर्स ने अपने लेटर में लिखा कि 

दिल्ली के दंगों की त्रुटिपूर्ण जाँच के बारे में पुलिस आयुक्त, दिल्ली को एक खुला पत्र, फरवरी 2020


श्री एस.एन. श्रीवास्तव, IPS, पुलिस आयुक्त दिल्ली

प्रिय श्री श्रीवास्तव जी

हम, अधोहस्ताक्षरी, भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और विभिन्न सेवाओं से संबंधित सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक समूह से संबंधित हैं और जिसे संवैधानिक आचरण समूह (CCG) के रूप में जाना जाता है। श्री जूलियो रिबेरो एक आईएएस अधिकारी (एक प्रकाशन के रूप में इसे डालें) और CCG के सबसे मूल्यवान सदस्यों में से एक है। हम आपके द्वारा लिखे गए पत्र के बारे में आपको लिखे गए पत्र का समर्थन करना चाहेंगे।

दिल्ली दंगा के अलावा, हम यह कहना चाहेंगे कि यह वास्तव में भारतीय पुलिस के इतिहास में एक दुखद दिन है कि इस वर्ष के दंगों के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए गए जांच और चालान व्यापक रूप से पक्षपातपूर्ण माने जाते हैं और राजनीति से प्रेरित है। यह उन सभी पुलिस अधिकारियों को पीड़ा देता है, जो सेवा करने के साथ-साथ सेवानिवृत्त भी होते हैं, जो कानून और हमारे संविधान के शासन को बनाए रखने में विश्वास करते हैं।

हमें यह जानकर दुख हुआ कि आपके विशेष आयुक्तों ने अपने समुदाय से जुड़े कुछ दंगाईयों की गिरफ्तारी को लेकर हिंदुओं में आक्रोश फैलाने वाली जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी, पुलिस नेतृत्व में इस तरह के प्रमुख रवैये से हिंसा और पीड़ितों के लिए न्याय का संकट पैदा होता है। अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित उनके परिवार के सदस्यों का यह मतलब होगा कि बहुसंख्यक समुदाय से संबंधित हिंसा के वास्तविक अपराधी मुक्त रूप से घुमते रहें।

जो हमें अधिक पीड़ा देता है, वह यह है कि दिल्ली पुलिस उन सभी लोगों को आरोपित कर रही है जो नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और भाषण में शामिल हुए थें, वे केवल संविधान द्वारा गारंटीकृत के रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग कर रहे थें। ठोस सबूतों के बिना खुलासे पर जांच पड़ताल निष्पक्ष जांच के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। नेताओं और कार्यकर्ताओं को आरोपित करते हुए, जिन्होंने हिंसा भड़काने वाले और सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े लोगों के सीएए के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है।

इस तरह की जांच से ही लोगों का लोकतंत्र, न्याय, निष्पक्षता और संविधान पर विश़्वास में कमी आएगी। यह एक खतरनाक सोच जो अंततः एक व्यवस्थित समाज के स्तंभों को हिला सकती है और कानून और व्यवस्था के टूटने का कारण बन सकती है।


इसलिए, हम आपसे सभी दंगों की पुरी निष्पक्षता के साथ पुन: जाँच करने का अनुरोध करते हैं क्योंकि जाँच का पहला आधार यही है कि पिड़ित व्यक़्ति और उसके परिवार को कानुनन इंसाफ मिले।




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