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Thursday, September 10, 2020

आफताब आलम के हत्यारों पर UAPA के तहत केस दर्ज हो - पत्रकार पंकज चतुर्वेदी

ड्रायवर आफताब आलम की हत्या केस ने उत्तर प्रदेश पुलिस की योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है, जब हत्या सांप्रदायिक हिंसा के कारण हुई और इसका सबुत आफताब के बेटे ने वॉयस रिकॉरडिंग के तौर पर दिया तब भी पुलिस ने सिर्फ लूट और हत्या का केस दर्ज क्यों किया? गौरतलब है कि बीते रविवार को ग्रेटर नोएडा में टैक्सी ड्राईवर आफताब आलम की हत्या सांप्रदायिक हिंसा के कारण और जबरन जय श्री राम बुलवाने की कोशिस में कर दी गई थी।

Journalist Pankaj Chaturvedi
इस घटना के बाद पुलिस के गैरजिम्मेदाराना रवैये से क्षुब्ध Freelance Journalist पंकज चतुर्वेदी ने पुरे घटना क्रम को विस्तार से ब्यान करते हुए कहा कि इस रविवार की घटना ने मुझे लिखने के लिए मजबूर कर दिया – एक बीस साल का बेटा, फोन पर अपने पिता की मौत के पहले के अंतिम क्षण सुन रहा है लेकिन बेबस इस भयानक मंजर को झेल रहा है। सोमवार व् मंगलवार को शायद आप लोगों के सामने से एक खबर गुजरी हो जिसमें ग्रेटर नोयडा में दादरी के कोट गाँव के करीब एक टैक्सी चालक की ह्त्या व् लूट की बात कही गयी थी, यदि उस मृतक आफताब के बेटे साबिर के मोबाईल पर दर्ज चालीस मिनिट की काल रिकार्डिंग को सुन लें तो स्पष्ट हो जाएगा कि यह महज ह्त्या का मामला नहीं है – यह  सांप्रदायिक नफरत में ह्त्या का आतंकी वाक्या है – 

दिल्ली के मयूर विहार फेज वन के करीब त्रिलोक पूरी में रहने वाले टैक्सी ड्रायवर आफताब आलम इसी रविवार को अपने पुराने ग्राहक को गुरुग्राम से बुलंद शहर के लिए छोड़ने कोई तीन बजे दिन में निकले, शाम सात बजे वे बुलंद शहर से चले तो भूड चौराहे पर उन्हें कोई सवारी मिल गयी , आफताब जी ने साढ़े सात बजे अपने बेटे साबिर को फोन कर फ़ास्ट टैग  चार्ज करवाने को कहा। थोड़ी देर बाद फिर उनका कॉल आ गया – शायद आफताब को एहसास हो गया था कि उनके साथ बैठी सवारी गड़बड़ है – उन्होंने अपना फोन चालू कर जेब में रख लिया – इधर बेटे को भी जब कुछ अंदेशा हुआ तो उसने इस कॉल को रिकॉर्डिंग में डाल दिया सारी बातचीत में पहले सवारी उनसे शराब पीने को कहती है – जब वे इसके लिए मना करते हैं तो उनका नाम पूछती है , उसके बाद सांप्रदायिक गालियाँ दी गई। कॉल से स्पष्ट होता है कि उन्हें जबरिया जय श्री राम बुलवाया गया और उसके बाद उनके सर पर शराब की बोतल से प्रहार हुआ, थोड़ी देर बाद यह आवाज़ आई कि – इसकी सांस रुक गयी है – 

यह सब सुन कर साबिर अपने करीबी त्रिलोकपुरी थाने गये तो वहां एक उप निरीक्षक संजय ने तत्काल सहयोग करते हुए – उनके पिता  की आखिरी लोकेशन बादलपुर गाँव के पास ट्रेस कर बता दी – जब ये लोग रात में वहाँ गए तो पिता  की कार खड़ी देखी और वहाँ दो पुलिस वाले के भी देखा। जब इन्होने अपने पिता  के बारे में पूछा तो दो घंटे इधर उधर तलाशते रहे कि उन्हें अस्पताल में भेजा है और वे ठीक हैं।

पत्रकार पंकज चतुर्वेदी ने पुलिस पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि पुलिस ने महज लूट और ह्त्या का मामला दर्ज कर लिया – इस मामले में कई सवाल हैं –

1. पुलिस को कैसे पता चला कि लूट 3500 रूपये की है जबकि मृतक की जेब में कितने पैसे थे, यह कोई नहीं जानता।

2. जिस अस्पताल में पुलिस भरती करवाने की बात कर रही है , उस अस्पताल में आफताब के भरती करवाने का कोई रिकार्ड ही नहीं है।

3. पुलिस अब बगैर जानकारी के केस को बुलंदशहर ट्रांसफर कर रही है , चूँकि मृतक के परिवार वाले अर्थात मुद्दई दिल्ली में रहते हैं – जाहिर है कि इतनी दूर केस करने से उन्हें दिक्कत होगी। 

4. पुलिस के पास रास्ते के कई टोल नाकों और बुलंद शहर के सी सी टी वी फुटेज हैं और उनमें 3 हत्यारे स्पष्ट दिख रहे हैं – फिर उनका चेहरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?

5. जब बातचीत में साफ़ इस्लामोफोबिया , धार्मिक गाली , जय श्री राम के नारों की बात है तो पुलिस ने यह केस में दर्ज क्यों नहीं किया?

अब बात आफताब जी के परिवार की – वे 1996 से दिल्ली में हिन्दू बाहुल्य मुहल्ले में रह कर टैक्सी चला रहे हैं , कल मेरी बेटी तमन्ना उनके घर गयी थी और उसने देखा कि सारा मुहाल्ला उनके परिवार के साथ है।

बेटा साबिर दिल्ली विश्विद्यालय से बी० कॉम कर रहा है और दोनों छोटे भाई शहीद और साजिद ई० डब्लू० एस० कैटेगरी में इलाके के प्रतिष्ठित एह्ल्कोंन पब्लिक में पढ़ रहे हैं और कक्षा दसवीं में 92 फीसदी अंक लाये। आफताब जी के माता पिता  भी हैं , उनकी पत्नी ने अपना घर दिखाते हुए कहा कि “भले ही उनके यहा खाने के बर्तन खाली हों लेकिन किताबो की अलमारी भरी रहती है। इनके पिताजी बच्चों को अधिक से अधिक पढ़ाना चाहते थें।“

चूँकि सब कुछ फोन कॉल में दर्ज है सो इस पर कोई शक नहीं की यह एक नफरती आतंकी कार्यवाही है। आज इस परिवार के बच्चों की पढाई , परिवार के जीवकोपार्जन का संकट सामने है क्योंकि आफताब जी उनके यहा एकमात्र कमाने वाले सदस्य थें।

पत्रकार पंकज चतुर्वेदी ने सरकार से माँग करते हुए कहा कि हमारी मांग है कि हत्यारों को बेनकाब किया जाए और उनकी साम्प्रदायिक मंशा का खुलासा हो, उन पर आतंकी कार्यवाही अर्थात UAPA का केस दर्ज हो, परिवार के बेहतर जीवकोपार्जन, बच्चों की पढाई के लिए दिल्ली व् उत्तर प्रदेश सरकार मदद करे।

पंकज चतुर्वेदी ने अपने समर्थ साथियों , परिचित संस्थाओं से अपील की है कि आफताब जी के सपनो को साकार करने के लिए उनके बच्चों की पढाई जारी रखने में मदद करें।

देश रक्षक न्युज़ भी उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस से निवेदन करती है कि इस केस की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के खिलाफ न्यायोचित कार्यवाई की जाए।

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