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Tuesday, August 25, 2020

क्या तुर्की के राष्ट्रपति की पत्नी से मिलना या ना मिलना देशभक़्ति का पैमाना है? पढ़िए पुरा लेख!

आमिर खान की देशभक़्ति और जनसेवा को क्यों भूल गए लोग? क्या तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब तैयब एर्दोगान की पत्नी से मुलाकात करना या ना करना देशभक़्ति या देशप्रेम का पैमाना बनेगा? इस मुद्दे पर एक फेसबुक युजर Bablu Rana अपने विचार रखें, 



आमिर खान का एक फाउंडेशन है पानी फाउंडेशन, इस फाउंडेशन ने साल 2016 में 116 गांव गोद लिए, साल 2019 तक वॉटर फाउंडेशन ने 4706 गांव गोद ले लिए। साल 2019 तक आमिर की संस्था ने 55000 करोड़ लीटर जल का संरक्षण किया। जिसकी मार्किट वैल्यू 11,020 करोड़ रुपए है। ये छोटा बदलाव नहीं है। आप अंदाजा नहीं लगा सकते इस मेहनत ने कितने सूखे गलों तक पानी पहुंचाया होगा। और मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि उनमें से अधिकतर हिन्दू ही होंगे जिन्हें आमिर की संस्था से लाभ मिला है।

साल 2013 में उत्तराखंड में आई बाढ़ के दौरान भी आमिर ने अपनी सम्मत के आधार पर मदद की थी। कोविड-19 के समय भी उन्होंने पीएम केयर फंड में अपना योगदान दिया था। महाराष्ट्र सरकार के रिलीफ फंड में भी उन्होंने कॉन्ट्रिब्यूशन किया था। लेकिन आपको तुर्की देश का नाम रटा देने वाला एंकर ये कभी नहीं बताएगा कि स्क्रीन के अलावा भी आमिर का एक सुंदर चेहरा है जिसे कम ही लोग जानते हैं। आमिर ने आपदा के समय जब भी मदद की, कभी भी किसी मीडिया में नहीं छपवाया, पीआर नहीं किया। फ़ोटो नहीं खिंचवाए, आपको आमिर का नाम अचानक ही क्यों सुनाई देता है? क्योंकि वह आदमी लाइमलाइट और मीडिया से बहुत दूर रहता है। उन्हें हर रोज हेडलाइन्स बनना पसन्द नहीं है जिसकी चाह हर व्यक्ति को रहती है।



जिस तरह आमिर के मुसलमान होने को टारगेट किया जा रहा है उससे यही लगता है कि प्रॉब्लम तुर्की जाने में नहीं है प्रॉब्लम आमिर के मुसलमान होने में है। लेकिन आपको एक बात याद रखनी चाहिए, जिस तरह मुशर्रफ से मुलाकात के बाद अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान प्रेमी नहीं हो जाते। नवाज शरीफ से मुलाकात के बाद मोदी नवाज प्रेमी नहीं हो जाते। वैसे ही तुर्की की प्रथम महिला से मिलने के बाद आमिर एंटी इंडिया नहीं हो जाते।



किसी से मुलाकात का अर्थ उससे सहमति नहीं है। जरूरी नहीं है कि एमीन एर्दोगन से मुलाकात करने वाले आमिर, उनकी बातों से सहमत भी हों या जरूरी ये भी नहीं कि कश्मीर के प्रति जो व्यूज एर्दोगन के रहे हों, वे आमिर के भी हो।

आमिर का मूल्यांकन आमिर के विचारों के आधार पर तय किया जाना चाहिए, न कि उन लोगों के विचारों के आधार पर जिनसे कि वे मुलाकात करते हैं।

नोट- इस लेख में लिखी गई बातें लेखक के निजी विचार हैं, देश रक्षक न्युज़ इसकी किसी भी प्रकार से ज़िम्मेदारी नही लेती है।

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